SSC Protest 2025: सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए SSC (Staff Selection Commission) एक बड़ा प्लेटफॉर्म है। हर साल SSC CGL, CHSL, MTS जैसी परीक्षाओं के ज़रिए केंद्र सरकार की नौकरियाँ दी जाती हैं। लेकिन 2025 में इन परीक्षाओं को लेकर एक ऐसा बवाल खड़ा हो गया है, जिसने पूरे देशभर के छात्रों को सड़कों पर ला खड़ा किया है।
SSC Protest 2025: आखिर क्यों बार-बार आ रहा है Eduquity का नाम
छात्रों का आरोप है कि SSC द्वारा करवाई गई हालिया परीक्षाओं में भारी गड़बड़ियाँ हुई हैं। रिजल्ट में ग़लत अंक, पेपर के दौरान तकनीकी खराबी, समय के बीच में सर्वर का डाउन होना जैसे कई मुद्दों ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। और इसी के बीच ‘Eduquity’ नाम की एक कंपनी का जिक्र हर तरफ होने लगा है।
Eduquity कौन है और यह SSC परीक्षा से कैसे जुड़ी है?
Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. एक निजी कंपनी है जो online exam management और assessment solutions प्रदान करती है। इसका मुख्य काम विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाओं के लिए Computer Based Test (CBT) आयोजित करना है।
2024-2025 के लिए SSC ने Tier 1 और Tier 2 परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी Eduquity को दी थी। इसके बाद ही परीक्षा में गड़बड़ियों की खबरें सामने आने लगीं और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।
छात्रों के मुख्य आरोप: Eduquity पर क्या हैं सवाल?
1. तकनीकी खराबी और सर्वर फेलियर
कई छात्रों ने बताया कि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर बार-बार हैंग हो रहा था। कुछ के तो सिस्टम बंद ही हो गया और उन्हें समय से पहले ही परीक्षा छोड़नी पड़ी।
2. मार्किंग में भारी गड़बड़ी
छात्रों का कहना है कि जिनका पेपर बेहद अच्छा गया था, उनका स्कोर 0 या बहुत कम आया। Answer Key में भी कई गलतियां पाई गईं।
3. रिजल्ट में पारदर्शिता की कमी
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों को ना तो proper explanation मिला, ना ही कोई review mechanism। इससे शक और भी गहरा हो गया।
4. पेपर लीक की आशंका
कुछ प्रश्न सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले ही वायरल हो चुके थे, जिससे पेपर लीक होने की संभावना जताई गई।
5. सिक्योरिटी और निष्पक्षता पर सवाल
एक्साम सेंटर पर किसी भी प्रकार की निगरानी नहीं थी। न कैमरे, न proper supervision। इससे भी छात्रों का भरोसा टूटा।
छात्रों का विरोध प्रदर्शन: सड़क से सोशल मीडिया तक
SSC की इस लापरवाही और Eduquity के खराब संचालन के खिलाफ देशभर में छात्र आवाज़ उठा रहे हैं। ट्विटर पर #SSC_ReExam, #Eduquity_Exposed जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
दिल्ली, लखनऊ, पटना, जयपुर जैसे शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए, हाथों में तख्तियाँ लेकर SSC के खिलाफ नारे लगाए और पुनः परीक्षा कराने की मांग की। कुछ छात्र Supreme Court में याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं।
SSC और सरकार की चुप्पी पर भी नाराजगी
अब तक SSC या केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस बयान नहीं आया है। इस चुप्पी ने छात्रों की चिंता को और गहरा कर दिया है।
छात्रों का सवाल है कि जब पहले से ही Eduquity पर अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं, तो SSC ने इसे कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया?
पहले भी विवादों में रह चुकी है Eduquity
यह पहली बार नहीं है जब Eduquity विवादों में घिरी है। इससे पहले कई राज्यस्तरीय परीक्षाओं में भी इस कंपनी के software glitches, server failures, login errors जैसे मुद्दे सामने आ चुके हैं।
2018 में कुछ राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में छात्रों ने Eduquity द्वारा आयोजित परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। लेकिन इसके बावजूद इसे SSC जैसी बड़ी संस्था का कॉन्ट्रैक्ट मिलना, अपने आप में सवाल पैदा करता है।
छात्रों की मांगें क्यों हैं ज़ायज़? क्या चाहते हैं SSC उम्मीदवार?
SSC परीक्षा 2025 को लेकर जिस तरह की गड़बड़ियाँ सामने आई हैं, उससे लाखों छात्रों का भरोसा टूट चुका है। छात्रों को न सिर्फ उनके मेहनत के फल में संदेह है, बल्कि उन्हें यह भी डर है कि अगर अभी कुछ नहीं बोला गया, तो आने वाली भर्तियाँ भी इसी तरह बर्बाद होंगी।
Eduquity द्वारा संचालित परीक्षाओं में हुई तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाहियों को देखते हुए, छात्र पांच मुख्य मांगों को लेकर एकजुट हैं। ये मांगे सिर्फ इस परीक्षा के नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली में सुधार की अपील हैं।
छात्रों की 5 बड़ी और मुख्य मांगें
1. Eduquity से SSC का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रद्द किया जाए
छात्रों का कहना है कि जिस कंपनी ने परीक्षा प्रक्रिया को सही से संभाल नहीं पाया, उस पर और जिम्मेदारियाँ देना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसलिए SSC को तुरंत उसका कॉन्ट्रैक्ट रद्द करना चाहिए।
2. सभी CBT परीक्षाएं दोबारा निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाएंजिन परीक्षाओं में गड़बड़ियाँ हुई हैं, उन्हें दोबारा आयोजित किया जाए — लेकिन इस बार किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी के ज़रिए, जिसमें पारदर्शिता और तकनीकी क्षमता हो।
3. रिज़ल्ट और उत्तर कुंजी (Answer Key) की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए
छात्रों की मांग है कि पूरे परीक्षा परिणाम और उत्तर कुंजी की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि सही और गलत का स्पष्ट खुलासा हो सके।
4. भविष्य में ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए
जिन कंपनियों पर पहले से विवादों के आरोप लगे हों या जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की हो, उन्हें सरकारी टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट्स से हमेशा के लिए बाहर किया जाए।
क्या कहती है शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई?
यह पूरा मामला केवल Eduquity या SSC तक सीमित नहीं है। यह हमारी परीक्षा प्रणाली, एजेंसी चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता की भारी कमी को उजागर करता है। जब देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हो, तो परीक्षा संचालन जैसी प्रक्रिया में सिर्फ cheapest vendor को चुनना भारी गलती है।
निष्कर्ष:
Eduquity का नाम अब छात्रों के लिए सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम का प्रतीक बन चुका है, जहां न पारदर्शिता है, न जवाबदेही।
SSC जैसी संस्था पर देश का भरोसा है। अगर वो भी ऐसे प्राइवेट एजेंसियों के भरोसे परीक्षा करवाएगी, तो योग्य छात्रों के सपनों को बार-बार कुचला जाएगा। अब वक्त आ गया है कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दोबारा खंगाला जाए और युवाओं का भरोसा फिर से बहाल किया जाए।

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